Monday, 8 August 2022

Are Dwar Palo Kanhaiya Se Keh Do Lyrics In Hindi

 देखो देखो ये गरीबी,ये गरीबी का हाल  

कृष्ण के दर पे विश्वास लेके आया हूँ 

मेरे बचपन का यार है.. मेरा श्याम,

यही सोच कर मै आस कर के आया हूँ. 


अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो  

के दरपे सुदामा गरीब आ गया है

भटकते भटकते ना जाने कहा से

तुम्हारे महल के करीब आगया है


ना सरपे है पगडी ना तन पे है जामा, 

बतादो कन्हैया को नाम है सुदामा हा…

बतादो कन्हैया को नाम है सुदामा.

बस एक बार मोहन से जा कर के कह दो

के मिलने सखा बद‍नसीब आ गया है 

अरे द्वारपालो कन्हैया से कहदो  

के दरपे सुदामा गरीब आगया है


सुनते ही दौड़े चले आये मोहन, 

लगाया गले से सुदामा को मोहन हा…

लगाया गले से सुदामा को मोहन

हुआ रुख्मिणी को बहुत ही अचंभा

ये मेहमान कैसा अजीब आगया है


बराबर में अपने सुदामा बिठाये  

चरण आँसुओं से श्याम ने धुलाये 

चरण आँसुओं से श्याम ने धुलाये

ना घबरायो प्यारे जरा तुम सुदामा 

खुशी का समां तेरे करीब आ गया है 


अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो  

के दरपे सुदामा गरीब आगया है


Tuesday, 14 April 2020

आरती कीजै हनुमान लला की

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अनजानी पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जम कारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमान जी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की

विठुमाऊली तू माऊली जगाची

विठुमाऊली तू माऊली जगाची
माऊलीत मूर्ति विठ्ठलाची, विठ्ठला मायबापा ||
काय तुझी माया सांगु शिरीरंगा
संसाराचि पंढरी तू केली पांडुरंगा
डोळ्यांतून वाहे माय चंद्रभागा
अमृताची गोडी आज आलीया अभंगा
विठ्ठला पांडुरंगा
अभंगाला जोड टाळचिपळ्यांची
माऊलीत मूर्ति विठ्ठलाची, विठ्ठला मायबापा ||

लेकरांची सेवा केलीस तू आई
कसं पांग फेडू, कसं होऊ उतराई
तुझ्या उपकारा जगी तोड नाही
ओवाळीन जीव माझा सावळे विठाई
विठ्ठला मायबापा
जन्मभरी पूजा तुझ्या पाऊलांची
माऊलीत मूर्ति विठ्ठलाची, विठ्ठला मायबापा ||

लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा / शंकराची आरती

शंकराची आरती
लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा ।
वीषें कंठ काळा त्रिनेत्रीं ज्वाळा ॥
लावण्यसुंदर मस्तकीं बाळा ।
तेथुनियां जल निर्मळ वाहे झुळझूळां ॥ १ ॥
जय देव जय देव जय श्रीशंकरा ।
आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा ॥ ध्रु० ॥
कर्पूरगौरा भोळा नयनीं विशाळा ।
अर्धांगीं पार्वती सुमनांच्या माळा ॥
विभुतीचें उधळण शितिकंठ नीळा ।
ऐसा शंकर शोभे उमावेल्हाळा ॥ जय देव० ॥ २ ॥
देवीं दैत्यीं सागरमंथन पैअं केलें ।
त्यामाजीं जें अवचित हळाहळ उठिलें ॥
तें त्वां असुरपणें प्राशन केलें ।
नीळकंठ नाम प्रसिद्ध झालें ॥ जय देव० ॥ ३ ॥
व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी ।
पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारी ॥
शतकोटीचें बीज वाचे उच्चारी ।
रघुकुलतिलक रामदासा अंतरीं ॥ जय देव जय देव० ॥ ४ ॥

Monday, 6 April 2020

आरती गणपतीची

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची


सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची
कंठी झळके माळ मुक्ताफळाची
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती
दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती
जयदेव जयदेव
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा
रुणझुणती नुपुरे चरणी घागरिया
जयदेव जयदेव जयमंगल मूर्ती
दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती
जयदेव जयदेव
लंबोदर पितांबर फणिवर बंधना
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जयदेव जयदेव
जयदेव जयदेव जयमंगल मूर्ती
दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती
जयदेव जयदेव

वंदना

करितो वंदना गजनना ||
तुम्ही हासत नाचत या अंगना
करितो वंदना गजनना

मुळीच नव्हतं रे कान्हा माइया मनात

 मुळीच नव्हतं रे कान्हा माइया मनात मुळीच न्हतं रे कान्ह. कान्हा कान्हा कान्हा आज माइया मनात 'तुइयासाठी. तुइयासाठी. तुइयासाठी. तुब्यासाठी...